उँगली पकड़ाओ इनको तो, हाथ मिलाने लगते हैं एक ग़ज़ल सुन लो तो ज़ालिम चार सुनाने लगते हैं इस जीवन में थोड़ी दिक़्क़त अच्छी होती है यारो ख़ाली सड़कों पर हम गाड़ी तेज़ चलाने लगते हैं
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान
Nida Fazli
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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जो साँसों को गिनते गिनते जीता है उस की मौत ज़रा जल्दी आ जाती है
Tanoj Dadhich
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दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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तुम सेे बिछड़े फिर भी साँसे चलती हैं मछली पानी के बाहर भी ज़िंदा है
Tanoj Dadhich
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एक ग़लत-फ़हमी ने ज़िंदा रक्खा है शे'र मेरे वो चुपके चुपके पढ़ती है
Tanoj Dadhich
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इक कमरे के कोने में ग़ज़लें लिखकर शाइ'र पूरी दुनिया पर छा जाता है
Tanoj Dadhich
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