इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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फ़र्क़ इतना है कि तू पर्दे में और मैं बे-हिजाब वर्ना मैं अक्स-ए-मुकम्मल हूँ तिरी तस्वीर का
Asad Bhopali
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अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी
Asad Bhopali
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ऐसे इक़रार में इनकार के सौ पहलू हैं वो तो कहिए कि लबों पे न तबस्सुम आए
Asad Bhopali
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जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए
Asad Bhopali
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