इश्क़ मेरा बन गया है जब इबादत फिर मैं देखूँ क्यूँ ही बिगड़ी अपनी हालत लोग कहते है तो कहने दो न उन को उन के कुछ कहने पे क्यूँ करते हो हैरत
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मोहब्बत जो समझते हैं वहीं हम को समझते हैं फ़क़त अब हम हक़ीकत भी यूँँ ख़्वाबों को समझते हैं
Shams Amiruddin
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सुनो न जान मेरी आज शाम तुम ठहर जाओ शराब की मिरी ये तिश्नगी बुझा के घर जाओ
Shams Amiruddin
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यूँँ मोहब्बत की क़सम खा बिछड़े वहाँ इक अलग दुनिया बसाई हम ने जहाँ मुझ से डरती है मेरी परछाई भी अब सो है मेरे साथ बस तन्हाई यहाँ
Shams Amiruddin
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खेल सारा ही फ़क़त क़िस्मत का है जाँ ख़त्म होती है यहाँ सारी दास्ताँ इश्क़ में मिलना मुक़द्दर है वर्ना तो मिट गए हैं इश्क़ के कितने ही निशाँ
Shams Amiruddin
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ख़ुदा से इक लड़ाई यूँँ लड़ी जाए मुआफ़ी बेवफ़ाओं को भी दी जाए सुना है बे-वफ़ाई शिर्क है फिर भी जो आए लौट कर वो अपना ली जाए
Shams Amiruddin
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