मोहब्बत जो समझते हैं वहीं हम को समझते हैं फ़क़त अब हम हक़ीकत भी यूँँ ख़्वाबों को समझते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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सुनो न जान मेरी आज शाम तुम ठहर जाओ शराब की मिरी ये तिश्नगी बुझा के घर जाओ
Shams Amiruddin
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यूँँ मोहब्बत की क़सम खा बिछड़े वहाँ इक अलग दुनिया बसाई हम ने जहाँ मुझ से डरती है मेरी परछाई भी अब सो है मेरे साथ बस तन्हाई यहाँ
Shams Amiruddin
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दौलत भी शोहरत भी निछावर तुझ पे सब रस्म-ए-मोहब्बत तुम निभाओ तो सही
Shams Amiruddin
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मैं एक रोज़ ख़ुद को ऐसा बनाऊँगा ओ खोने वाले तुझ को फिर याद आऊँगा आती है इस क़दर मुझ को याद गाँव की तुम देखना किसी दिन मैं लौट आऊँगा
Shams Amiruddin
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हाँ ये लहजा तिरा बता रहा हैं पहले सी बात अब नहीं तुझ में ख़ुद को तुम क्यूँ बदलती जा रही हो ऐसा भी क्या ही मिल गया है तुम्हें
Shams Amiruddin
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