इस सोच का क़ब्ज़ा मेरे इदराक पे होना अफ़लाक पे होने के लिए ख़ाक पे होना दुनिया मुझे पूछे कि ये ख़ुशबू है किधर की और मेरा ख़याल आप की पोशाक पे होना
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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बात यूँँ है कि ज़माने में बहारों का भरम आप के नाम से है आप मेरे नाम से हो इतनी रौशन तो कोई चीज़ नहीं होती है आप शायद किसी सय्यारा-ए-गुमनाम से हो
Ahmad Abdullah
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तनक़ीद न तक़रार बड़ी देर से चुप हैं हैरत है मेरे यार बड़ी देर से चुप हैं गूँगों को तकल्लुक़ के मवाक़े हैं मुयस्सर हम माहिर-ए-गुफ़्तार बड़ी देर से चुप हैं
Ahmad Abdullah
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पता करो कि मेरे साथ कौन उतरा था ज़मीं पे कोई अकेला नहीं उतरता है
Ahmad Abdullah
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मेरे तोहफ़ों ने मोहब्बत का भरम तोड़ दिया चूड़ियाँ तंग निकल आई हैं और हार खुले
Ahmad Abdullah
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