जंगल जला बारिश हुई फिर फूटे ये पौधे नए और लोग कहते हैं हुए हो जल्दी से आबाद तुम
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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दो जहाँ की ज़िंदगी जीकर चले हैं दो घड़ी मरते-मरते फिर मुझे कुछ और मरने दीजिए
nakul kumar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मेरी चाहत किसी आँगन की तुलसी है मैं कैसे घर में लाऊँ माँ कोई तुलसी
100rav
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तड़पता तू भी हाँ मिलने को मुझ सेे अगर मैं तेरे हिस्से में न होता
100rav
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ये दुनिया थी आज़ाद पंछी बना दी किसी ने घड़ी यार
100rav
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मेरी हालत देख कर भी लोग अब उस गली से हाँ गुज़रते ही नहीं
100rav
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लाश बन जाता है हर इंसान जो गर रूह निकले कहती है वो तुम मुझे क्या दूर करना चाहते हो
100rav
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