जीवन को गुलज़ार करें क्या क्या कहती हो प्यार करें क्या तुम को चूमा ग़लती कर दी ग़लती फिर इक बार करें क्या
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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कंठ में तुलसी की माला माथ पर चंदन तिलक है कृष्ण की वो है दुलारी दिल जिसे मैं दे चुका हूँ
Alankrat Srivastava
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देख दुनिया आँख होने पे था पछताया बहुत फिर तुम्हें देखा इन्हीं से और इतराया बहुत
Alankrat Srivastava
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सुर नहीं कहीं भी ऐसे कोई भी सितार में सुर जो बोली में है तेरी है तेरी पुकार में मंदिरों में मस्जिदों में बन नहीं सके मगर आदमी बने हैं आदमी पड़े जो प्यार में
Alankrat Srivastava
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बस ज़रा देर को बाग़ में बैठी वो पेड़ पौधे भी ग़ज़लें सुनाने लगे फूल भी ख़ास भाते न थे हम को पर साथ तुम थी तो काँटे सुहाने लगे
Alankrat Srivastava
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हूँ कैसा आदमी संकट में हँसता जा रहा हूँ मैं बुरे हर काम कर के भी सभी को भा रहा हूँ मैं ज़माने भर के दिल को तोड़ के आया हूँ मैं औ अब उन्हीं के दुख को अपना दुख बता कर गा रहा हूँ मैं
Alankrat Srivastava
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