जिसे तुम काट आए उस शजर को ढूँढ़ता होगा परिंदा लौट कर के अपने घर को ढूँढ़ता होगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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वैसे तो उस का नाम नहीं हाफ़िज़े में अब मुमकिन है रूबरू जो कभी हो, पुकार दूँ
Bhaskar Shukla
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इस कदर ख़्वाब हैं वस्ल के आँख में आबले पाँव के हम को दिखते नहीं
Bhaskar Shukla
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वरना तो ये दीवार-ओ-दर लगता है तुम होती हो घर में तो घर लगता है
Bhaskar Shukla
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मिले थे फरवरी में आपसे पहली दफ़ा हम तभी से दोस्ती सी हो गई है फरवरी से
Bhaskar Shukla
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ठीक थी उन सेे मुलाक़ात मगर ठीक ही थी फ़िल्म इतनी नहीं अच्छी कि दोबारा देखूँ
Bhaskar Shukla
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