जुर्म की तरह मोहब्बत को छुपा रक्खा है हम गुनहगार नहीं हैं ये बताएँ किस को रूठ जाते तो मनाना कोई दुश्वार न था वो तअ'ल्लुक़ ही न रक्खें तो मनाएँ किस को
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है दिल से अब दर्द की रुख़्सत नहीं देखी जाती
Akhtar Saeed Khan
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ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू ख़ुशी का लम्हा कोई याद आ गया होगा
Akhtar Saeed Khan
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कौन जीने के लिए मरता रहे लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले
Akhtar Saeed Khan
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हम ने माना इक न इक दिन लौट के तू आ जाएगा लेकिन तुझ बिन उम्र जो गुज़री कौन उसे लौटाएगा
Akhtar Saeed Khan
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बहुत क़रीब रही है ये ज़िन्दगी हम से बहुत अज़ीज़ सही ए'तिबार कुछ भी नहीं
Akhtar Saeed Khan
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