कभी बोझ आँसुओं का पलकों को ढोने नहीं देती ग़ज़ल महबूब है मेरी मुझे रोने नहीं देती
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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ज़बाँ दिल की यहाँ पर कौन समझे ख़मोशी को यहाँ सब मौन समझे
Raj Tiwari
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मिरी हर इक नज़र जिस पर ठहरती है बस उस की इक नज़र का मुंतज़िर हूँ मैं
Raj Tiwari
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ख़ामुशी जिन को समझदार बनाती है 'राज' अपनी आवाज़ को वो लोग तरस जाते हैं
Raj Tiwari
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ख़्वाब टूटा तो नींद रूठ गई नींद टूटी तो ख़्वाब भी ले उड़ी
Raj Tiwari
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