कह नहीं पा रहा कि क्या ग़म है लग रहा है कहीं पे कुछ कम है
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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यही सबब है कि हम हिज्र से हैं अफ़्सुर्दा हर एक हिज्र से पैदा विसाल होता नहीं
Sumit Panchal
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ये क़ैफियत है कि जब मेरा यार आँख में है गुलों का रंग, फिज़ां की बहार आँख में है
Sumit Panchal
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मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो फिर मेरे साथ चाहे जैसा हो
Sumit Panchal
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ये फ़रेब-ए-हयात है गोया जिस को हम सब हयात कहते हैं
Sumit Panchal
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इश्क़ से आश्ना नहीं थे हम फिर तआ'रुफ़ किसी ने करवाया
Sumit Panchal
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