कहाँ से आया है ये कौन है जो ऐसे शोर में भी मौन है नहीं बचने की गुंजाइश कोई यहाँ तो मूसा ही फिरऔन है
Related Sher
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
207 likes
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
208 likes
इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
238 likes
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
197 likes
More from MIR SHAHRYAAR
गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
MIR SHAHRYAAR
0 likes
बहुत क़रीब भी हैं दूर दूर भी हैं बहुत तू मह है बाम पे मैं ज़ेर-ए-बाम हूँ जानाँ
MIR SHAHRYAAR
0 likes
ज़रूरत थी बस बात करने की हम को मगर बात करने की फ़ुर्सत किसे है अब इस बस्ती में सब ख़ुदा बन गए हैं अब इक दूसरे की ज़रूरत किसे है
MIR SHAHRYAAR
1 likes
फिर हो रही है रुख़्सत उस की महक यहाँ से ये कमरा ये जहाँ फिर सुनसान होने को है
MIR SHAHRYAAR
0 likes
तुम साथ थे तो कितना आसाँ था मगर अब जाना है कितना कठिन है ये सफ़र जब सोचता हूँ तो नहीं आता यक़ीन कल तक मैं ही था तेरा मंज़ूर-ए-नज़र
MIR SHAHRYAAR
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on MIR SHAHRYAAR.
Similar Moods
More moods that pair well with MIR SHAHRYAAR's sher.







