कल सामने मंज़िल थी पीछे मिरी आवाज़ें चलता तो बिछड़ जाता रुकता तो सफ़र जाता
sherKuch Alfaaz
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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टैंक आगे बढ़ें कि पीछे हटें कोख धरती की बाँझ होती है
Sahir Ludhianvi
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