कलेजा खींचती है याद उस की वो इक चेहरा बहुत याद आ रहा है तुम्हारे हिज्र का ग़म इन दिनों में मेरे चहरे की रौनक़ खा रहा है
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
Shamsul Hasan ShamS
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मेरे जैसा ढूँढ़ रही हो हद होती है पागलपन की
Shamsul Hasan ShamS
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वक़्त लगेगा हम दोनों को लेकिन अच्छे हो जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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मंज़िल पे नहीं आ सका है कोई अभी तक उस सेे छुड़ा के हाथ सभी रास्ते में हैं
Shamsul Hasan ShamS
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