मंज़िल पे नहीं आ सका है कोई अभी तक उस सेे छुड़ा के हाथ सभी रास्ते में हैं
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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वक़्त लगेगा हम दोनों को लेकिन अच्छे हो जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन तुम्हारी बद-दुआ को सात बोसे
Shamsul Hasan ShamS
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मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
Shamsul Hasan ShamS
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तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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मैं इस लिए भी मोहब्बत न कर सका तुम सेे तुम्हारा इश्क़ मेरा रिज़्क़ छीन सकता था
Shamsul Hasan ShamS
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