कमी महसूस होती है तो ख़ुदस बात करता हूँ यूँँ अरसे से भरम रक्खा हुआ है ख़ैर-ख़्वाही का
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ
Umair Najmi
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यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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कौन छेड़े फिर वही क़िस्सा पुराना आतिशों का काम है जलना जलाना
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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