sherKuch Alfaaz

करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे

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मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ तसल्लुत अपने ही लिक्खे पे खोता जा रहा हूँ कहानी में तो इक अंजाम अच्छा ही लिखा था उसी अंजाम पर पैहम मैं रोता जा रहा हूँ

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं हाँ इक ऐसा दौर था जिस में बातें ख़त्म न होती थीं अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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निकलते हैं कफ़न बांधे फ़ना होने की निय्यत से के संग एक ही उछालेंगे मगर अब के तबीअत से

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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