sherKuch Alfaaz

निकलते हैं कफ़न बांधे फ़ना होने की निय्यत से के संग एक ही उछालेंगे मगर अब के तबीअत से

More from Saurabh Mehta 'Alfaaz'

उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

1 likes

मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ तसल्लुत अपने ही लिक्खे पे खोता जा रहा हूँ कहानी में तो इक अंजाम अच्छा ही लिखा था उसी अंजाम पर पैहम मैं रोता जा रहा हूँ

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

1 likes

यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

2 likes

ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

6 likes

शिकवे हैं शाने हैं अश्क-ओ-गिर्या है तुम ना हो तो फिर तो सारी दुनिया है

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

11 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Saurabh Mehta 'Alfaaz'.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Saurabh Mehta 'Alfaaz''s sher.