कमी बस आप की जस्सर मुसलसल खल रही है वगरना ज़िन्दगी तो अच्छी ख़ासी चल रही है
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अपना कंगन समझ रही हो क्या और कितना घुमाओगी मुझ को
Zubair Ali Tabish
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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है ज़िन्दगी एक नज़्म लगती है
Gulzar
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पास मैं जिस के हूँ वो फिर भी, अच्छा लड़का ढूँढ़ रही है उस ने लगा रक्खा है चश्मा, और वो चश्मा ढूँढ़ रही है फ़ोन किया मैं ने और पूछा, अब तक घर से क्यूँँ नहीं निकली उस ने कहा मुझ सेे मिलने का, एक बहाना ढूँढ़ रही है
Tanoj Dadhich
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उसे पागल बनाती फिर रही हो जिसे शौहर बनाना चाहिए था
Arvind Inaayat
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हर शे'र हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी
Sandeep Thakur
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ज़रा नज़दीक आ कर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू मेरी तहरीर बिन तेरे मुक़म्मल हो नहीं सकती
Avtar Singh Jasser
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तेरी आँखों ने दीवाना कर रखा है मंदिर जैसा दिल मयख़ाना कर रखा है
Avtar Singh Jasser
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तुझ से दूर हुआ तो ये मालूम हुआ ख़ुद से कितना दूर निकल आया था मैं
Avtar Singh Jasser
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पहले पहले जान छिड़कता था उस पे अब मैं उस सेे जान छुड़ाना चाहता हूँ
Avtar Singh Jasser
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मेरी क़िस्मत में बरबादियाँ थीं अज़ल से ही लिक्खी हुईं तुझ से जस्सर करूँँ क्या गिला तू फ़क़त इक बहाना हुआ
Avtar Singh Jasser
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