कज़ा की आरज़ू में जीते हैं 'सलमा' वगरना ज़िन्दगी ये मार ही डाले
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ज़ीस्त की थी जुस्तुजू अब भला हम क्या करें मौत का व्यापार था अब जिएँ या हम मरें सम्त सारी हैं कड़ी मुश्किलें 'सलमा' बड़ी मौत है अब आरज़ू ज़ीस्त का फिर क्या करें
Salma Malik
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तुम लड़के तो इश्क़ में पागल भी हो सकते हों हम लड़की तो इतनी ख़ुश-क़िस्मत भी नईं होती
Salma Malik
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ये ज़िन्दगी जीने को बस ज़िंदादिली सलमा ज़रूरी है ये बे-दिली तो आदमी को बे-दिली से मार देती है
Salma Malik
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हर चोट खाया शा'इरी तो करता है हर चोट खाया तो मगर शाइ'र नहीं
Salma Malik
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तुम किस कदर अपनी अना में फिरते हो हम किस कदर तुम पर गुमाँ करते रहे
Salma Malik
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