खड़ी है देह की जब तक इमारत बने रहना सदा आधार मोहन
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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अपनी मंज़िल पे पहुँचना भी खड़े रहना भी कितना मुश्किल है बड़े हो के बड़े रहना भी
Shakeel Azmi
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सभी के साथ दिखना भी मगर सब सेे जुदा रहना भी है उस को उदासी साथ भी रखनी है और तस्वीर में हँसना भी है उस को
Kafeel Rana
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आप अपने से हम-सुख़न रहना हमनशीं साँस फूल जाती है
Jaun Elia
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ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए
Javed Akhtar
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उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गए या'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गए हम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुई तुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए
Vikas Sahaj
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दुनिया मुझ को पागल करने वाली थी फिर मैं ने कुछ शे'र कहे और बच निकला
Vikas Sahaj
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मरने वाले को कब ये मालूम हुआ है पीछे मंज़र कितना दुखदाई होता है
Vikas Sahaj
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मैं तेरे पास वापस आ रहा हूँ दुबारा भेजना मत इस धरा पर
Vikas Sahaj
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दुनिया जिस ने जीती उस की ख़ातिर भी अब तक टेढ़ी खीर बनी है इक लड़की
Vikas Sahaj
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