ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में हमारे हाल पर कुछ मेहरबानी अब भी होती है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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कुछ इस तरह से याद आते रहे हो कि अब भूल जाने को जी चाहता है
Akhtar Shirani
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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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मोहब्बत के इक़रार से शर्म कब तक कभी सामना हो तो मजबूर कर दूँ
Akhtar Shirani
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मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई
Akhtar Shirani
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