ख़ुद को थोड़ा सा बचा लेता हूँ मैं कल के लिए सब्र के फल के लिए ज़िन्दगी के हल के लिए मिन्नतें की थी जो रो रो के जिस इक पल के लिए एक पल भी वो नहीं रुक सका इक पल के लिए
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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उस के पैग़ाम ने उम्मीद को भी तोड़ दिया उस का कहना है मुझे पाने की कोशिश न करे
Faiz Ahmad
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तुम्हारे ग़म को मगर ओढ़े रक्खा तीनों दिन मैं चाहता तो मना सकता था तेरे बिन ईद
Faiz Ahmad
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रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं
Faiz Ahmad
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ख़ुशी के साथ कब तक ज़िन्दगी गुज़ारते हम तिरा मलाल न होता तो मर गए होते मुहाल हो गया है एक पल भी तेरे बिना तू होती तो ज़माने भी गुज़र गए होते
Faiz Ahmad
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जाने कब से बरस रहा हूँ मैं इक नज़र को तरस रहा हूँ मैं ज़िन्दगी सहरा हो गई है मिरी मौत को जो तरस रहा हूँ मैं
Faiz Ahmad
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