उस के पैग़ाम ने उम्मीद को भी तोड़ दिया उस का कहना है मुझे पाने की कोशिश न करे
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आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Mirza Ghalib
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बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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किसी के रंज से उस को निकाल कर पहले उसी के रंज में अब ख़ुद ही फस गया हूँ मैं बड़ा कमीन हूँ दलदल में पैर ख़ुद रख कर ये कह रहा हूँ कि धोखे से धस गया हूँ मैं
Faiz Ahmad
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जाने कब से बरस रहा हूँ मैं इक नज़र को तरस रहा हूँ मैं ज़िन्दगी सहरा हो गई है मिरी मौत को जो तरस रहा हूँ मैं
Faiz Ahmad
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मैं तिरी मोहब्बत की कभी भी बर्बादी नहीं करूँंँगा मर मिटूंँगा लेकिन और किसी से मैं शादी नहीं करूँंँगा
Faiz Ahmad
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दिल को ले कर सुब्ह से ये ही गुमान आ रहा है जब कोई ज़ख़्म नहीं क्यूँ ये निशान आ रहा है तुम पे रहमत भी अज़ीयत की तरह बरसेगी देखते जाओ कि अहमद रमाज़ान आ रहा है
Faiz Ahmad
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ये सच है उस सेे मिलने की तवक्को फिर नहीं करते मगर पहली मोहब्बत को भुलाया भी नहीं जाता
Faiz Ahmad
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