ख़ुदस ही हो जो बरहम तो किधर जाए ज़िन्दा भी क्यूँँ रहे हम, क्यूँँ न मर जाए
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अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
Mahshar Badayuni
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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ज़बाँ की नस टटोली तो ये जाना मैं ने मिरी आवाज़ तो अब भी ज़रा ज़िंदा है
Yasmin Khan
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तज़्किरा छेड़ो न उस की बे-वफ़ाई का अब तुम्हें हम क्या बताए बात क्या क्या हैं
Yasmin Khan
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वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी
Yasmin Khan
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लत लगी तन्हाई की ऐसी मुझे अब जिस्म से साया भी मेरा काट दो तुम
Yasmin Khan
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क्या कमी है नहीं जानते बस किसी की कमी लग रही
Yasmin Khan
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