ख़ुदा की इबादत में मशग़ूल हैं वो जो माँ बाप की फ़िक्र करते नहीं हैं
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
156 likes
More from Wasif Quazi
वो समझते हैं जिस को दिल मेरा उन की यादों की क़ब्रगाह है वो
Wasif Quazi
0 likes
न जाने पत्थरों ने कैसा जादू कर दिया वासिफ़ गले से मुस्कुरा कर शीशे भी अब उन सेे मिलते हैं
Wasif Quazi
0 likes
ज़िंदा रखने को ख़्वाहिशें उन की दफ़्न सब अपनी हसरतें कर दीं
Wasif Quazi
0 likes
सदियाँ हिज्र की देखी हैं आँखों ने इस सेे हसीं सजा अब और क्या होगी
Wasif Quazi
0 likes
उन पे कुछ शे'र जब कहे मैं ने मेरी ग़ज़लों में जान तब आई
Wasif Quazi
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Wasif Quazi.
Similar Moods
More moods that pair well with Wasif Quazi's sher.







