खु़दी में क्यूँ सनम मदहोश रहती हो सुना है तुम बहुत ख़ामोश रहती हो
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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जब से वो कह कर गई तू साँवला है तब से कानों में यही बस गूँजता है
S M Afzal Imam
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वो खु़द भी कितना खा़ली है उसे बता दिया मैं ने के आज आईने को आईना दिखा दिया मैं ने
S M Afzal Imam
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हम ही विरसे में दिया करते हैं उन को ये ख़राबी वरना बच्चों को कहाँ आता है बातों को छुपाना
S M Afzal Imam
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आँसू जो उन के आँखों से निकल जाते हैं पत्थर दिल भी पल भर में ही पिघल जाते हैं ज़ख़्मी होने से मैं दिल को बचाऊँ कैसे वो मुस्काते हैं तो ख़ंजर चल जाते हैं
S M Afzal Imam
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परेशांँ लोग सारे हैं के क्यूँँ आदत में शामिल है तेरा अफ़ज़ल जहाँँ जाना वहीं मशहूर हो जाना
S M Afzal Imam
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