हम ही विरसे में दिया करते हैं उन को ये ख़राबी वरना बच्चों को कहाँ आता है बातों को छुपाना
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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वो खु़द भी कितना खा़ली है उसे बता दिया मैं ने के आज आईने को आईना दिखा दिया मैं ने
S M Afzal Imam
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बैठ तो दो पल माँ के पास दो पल को ही बातें कर
S M Afzal Imam
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न जाने कैसा रिश्ता है ये मेरा और अब्बू का मुझे तकलीफ़ होती है तो उन को ख़्वाब आते हैं
S M Afzal Imam
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आँसू जो उन के आँखों से निकल जाते हैं पत्थर दिल भी पल भर में ही पिघल जाते हैं ज़ख़्मी होने से मैं दिल को बचाऊँ कैसे वो मुस्काते हैं तो ख़ंजर चल जाते हैं
S M Afzal Imam
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इब्तिदा कहानी की मुस्कुराने से हुई और बाक़ी काम फिर शा'इरी ने कर दिया
S M Afzal Imam
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