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बैठ तो दो पल माँ के पास दो पल को ही बातें कर

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आज ये राज़ भी मैं बता देता हूँ क्यूँँ तुझे देख के मुस्कुरा देता हूँ आग लगती है जो देखने से तुझे मुस्कुरा कर उसी को हवा देता हूँ

S M Afzal Imam

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यही कहता हूँ मैं सब सेे, मोहब्बत कर नहीं सकता किसी पर मर चुका हूँ मैं, किसी पर मर नहीं सकता मगर ऐसा नहीं बिल्कुल के सब कुछ भूल जाउँगा दिया है ज़ख़्म जो तू ने कभी वो भर नहीं सकता

S M Afzal Imam

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बरसों पहले इश्क़ में पड़ना छोड़ दिया है तुम को हारा तब से लड़ना छोड़ दिया है अपनी मर्ज़ी है ठहरे या जाए कोई 'अफ़ज़ल' ने अब हाथ पकड़ना छोड़ दिया है

S M Afzal Imam

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वो खु़द भी कितना खा़ली है उसे बता दिया मैं ने के आज आईने को आईना दिखा दिया मैं ने

S M Afzal Imam

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हम ही विरसे में दिया करते हैं उन को ये ख़राबी वरना बच्चों को कहाँ आता है बातों को छुपाना

S M Afzal Imam

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