sherKuch Alfaaz

यही कहता हूँ मैं सब सेे, मोहब्बत कर नहीं सकता किसी पर मर चुका हूँ मैं, किसी पर मर नहीं सकता मगर ऐसा नहीं बिल्कुल के सब कुछ भूल जाउँगा दिया है ज़ख़्म जो तू ने कभी वो भर नहीं सकता

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on S M Afzal Imam.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with S M Afzal Imam's sher.