कि तेरे ख़त जलाना चाहते थे हम न जाने हाथ अपना क्यूँँ जला बैठे
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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ये तो बस मेरा मुक़द्दर नईं सही वरना कोई ऐब नईं “दीवानी“ में
karan singh rajput
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ये कैसा जादू तू ने कर दिया है मुझ पे मेरी जाँ? किसी को भी मैं देखूँ चेहरा तेरा याद आता है
karan singh rajput
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रात भर गिरते है आँसू आँख से तब कहीं जा कर सवेरा होता है
karan singh rajput
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तू ने ही तो चाहा था के मैं तेरा बनके रहूँ बस मैं ने सो तेरी ख़ुशी के वास्ते हर शय भुला दी
karan singh rajput
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किया जो साथ उस के मैं ने, मुझ को ये लगा दिल से उतर जाऊँगा लेकिन नईं
karan singh rajput
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