kis ki holi jashn-e-nau-rozi hai aaj surkh mai se saqiya dastar rang
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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अब की होली में रहा बे-कार रंग और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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ग़ैर से खेली है होली यार ने डाले मुझ पर दीदा-ए-ख़ूँ-बार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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