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किसे रोकें चले जाएँगे हम भी जिसे जाना था वो मर के गया है

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ये तो ख़ुद की ग़लती थी शिकायत किस को करना है लो तुम ज़िन्दगी रख लो मुझे तो रोज़ मारना है जाने कैसी घड़ी थी वो मिले तुम जिस में आ कर के तब जो ले गए थे तुम अब उसे ता-उम्र भरना है

Praveen Bhardwaj

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ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं

Praveen Bhardwaj

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सबकी अपनी-अपनी मर्ज़ी होती हैं जो यहाँ से अब जैसा चाहें वैसा चुने उस की मर्ज़ी हैं पत्थर को फूल समझे या फिर अपने फूल से बस काँटा चुने

Praveen Bhardwaj

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वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं

Praveen Bhardwaj

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कोई ग़म है तो बता के देख मुझे या अपने दिल से लगा के देख मुझे ग़ैरों की बातों पर मत यक़ीन कर तू कभी ख़ुद भी तो आ के देख मुझे

Praveen Bhardwaj

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