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वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं

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ये तो ख़ुद की ग़लती थी शिकायत किस को करना है लो तुम ज़िन्दगी रख लो मुझे तो रोज़ मारना है जाने कैसी घड़ी थी वो मिले तुम जिस में आ कर के तब जो ले गए थे तुम अब उसे ता-उम्र भरना है

Praveen Bhardwaj

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वो लहर कभी हदों से उतर कर नहीं गया जो कभी उतर कर गया मुड़कर नहीं गया

Praveen Bhardwaj

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मेरा सब कुछ भी तेरे लिए काफ़ी नहीं था तू मेरे लिए काफ़ी था, मैं काफ़ी नहीं था इस वजह से भी रात को ढालना पड़ा था चाँद का रौशन होना तुझे काफ़ी नहीं था

Praveen Bhardwaj

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ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं

Praveen Bhardwaj

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किरदार चाहता है की बस ग़म निकाल दें हम भी तो चाहते यही है हम निकाल दें तुम चाहते हो इस में की बस तुम नहीं रहो 'मैं' नइँ बचेगा इस में अगर 'हम' निकाल दें

Praveen Bhardwaj

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