किसी को क्या पता सीने के कितने ज़ख़्म गहरे हैं सिवा तेरी मुहब्बत के कोई मरहम नहीं होगा
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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पानी में मैं डूब रहा हूँ देख मुझे दरिया से ख़ुद दूर किनारा जाएगा
Shubham Seth
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किसी की ख़्वाहिशों को कब तलक तुम बाँध पाओगे बड़ा वो पेड़ होगा और गमला टूट जाएगा
Shubham Seth
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दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी
Shubham Seth
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शिकायत के सिवा देखो उसे कुछ भी नहीं आता अगर हम एक-दो कर दें उसी पर रूठ जाता है
Shubham Seth
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अकेलापन हमें खा जाएगा मालूम तो था तुझे देखे बिना फिर भी मरेंगे कम अकेले
Shubham Seth
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