किस को फ़ुर्सत है किसी की नाज़ बरदारी करे आदमी हर एक अपने आप में मसरूफ़ है
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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उस की चाहत में भी इख़लास नहीं था शायद और कुछ हम भी उसे दिल से नहीं चाह सके
Salman ashhadi sahil
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याद करने की सहूलत तो मुयस्सर थी मगर भूल जाना ही उसे मैं ने ज़रूरी समझा
Salman ashhadi sahil
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आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ
Salman ashhadi sahil
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फिर यूँँ हुआ कि शहर की रौनक़ को छोड़कर हम ऐसे लोग गाँव की जानिब निकल पड़े
Salman ashhadi sahil
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भटके तमाम उम्र हम आवारगान-ए-इश्क़ लेकिन किसी के दिल में ठिकाना नहीं मिला
Salman ashhadi sahil
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