कोई बरसती आँखों में तुम को न पढ़ ले दोस्त बरसों इस एहतियात से रोए नहीं हैं हम
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
Almas Rizvi
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कोई हिजरत कोई विसाल नहीं ख़्वाब में भी तेरा ख़याल नहीं सी लिए होंठ रब की मर्ज़ी पे मेरे लब पर कोई सवाल नहीं
Almas Rizvi
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दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
Almas Rizvi
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दिल सोचता है बस ये फ़राग़त के वक़्त में मिलने के तुझ सेे ख़्वाब जो देखे थे क्या हुए जो इक अदा पे जान लुटा देते थे कभी वो सारे दावेदार मोहब्बत के क्या हुए
Almas Rizvi
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अता किया हुआ नाम ओ नुमूद बे-मानी न हो ख़ुलूस तो सारे सुजूद बे-मानी
Almas Rizvi
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