कोई पूछे तो ज़रा क्या है ये अंदाज़-ए-सुख़न लहजा शीरीं है मगर ज़ख़्म लगे जाते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़िंदगी इस तरह गुज़री है ग़मों के दरमियाँ दर्द थे इतने कि मेरा मुस्कुराना रह गया
Kamran Abbas
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वो मुझ से दूर हुआ मेरे पास आते हुए अँधेरा हो गया घर में दिया जलाते हुए
Kamran Abbas
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उस की हिजरत की रात देर तलक तन्हा देखा है मैं ने आधा चाँद
Kamran Abbas
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यादों के कारवाँ में मुसलसल सफ़र किया तब जाके हम ने आज दिसंबर बसर किया
Kamran Abbas
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हसरत तमाम उम्र की सीने में रह गई जाते हुए भी मुझ से वो मिल कर नहीं गया
Kamran Abbas
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