ज़िंदगी इस तरह गुज़री है ग़मों के दरमियाँ दर्द थे इतने कि मेरा मुस्कुराना रह गया
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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यादों के कारवाँ में मुसलसल सफ़र किया तब जाके हम ने आज दिसंबर बसर किया
Kamran Abbas
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उस की हिजरत की रात देर तलक तन्हा देखा है मैं ने आधा चाँद
Kamran Abbas
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तीरगी बैठी है मेरे घर में और तो हर तरफ़ उजाले हैं
Kamran Abbas
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सियाह रात में माह-ए-कमाल आया है वफ़ा के नाम पर उन का ख़याल आया है
Kamran Abbas
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वो मुझ से दूर हुआ मेरे पास आते हुए अँधेरा हो गया घर में दिया जलाते हुए
Kamran Abbas
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