कुछ धुँधला सा यूँँ दिखता है आईने में जैसे पन्नों पे सियाही मिरे ज्यूँ फैल गई हो
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तुम जिस्मों का प्यार समझ बैठे हम को तो रूहों तक जाना था
Manish Yadav
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हुआ था तय नहीं कुछ भी मुहब्बत में मनाएँगे नहीं तुम को अगर रूठे
Manish Yadav
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कुछ ऐसा सितम वक़्त ने मुझ पे जो किया है चाहा जिसे भी वो ही गया हाथ छुड़ा के
Manish Yadav
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वो सर-गुज़श्त कभी उन की जो पढ़ी मैं ने मेरा ही नाम न आया मेरी कहानी में
Manish Yadav
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राह का रह-गुज़र ही निकला वो मैं ने समझा था हम-सफ़र उस को
Manish Yadav
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