कुछ मुस्कुरा के हम ने, कहानी ही बदल दी वो हम सेे उदासी का सबब पूछ रहा था
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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ये किस का अक्स है हर सू समाया छुपा है कौन मेरी पुतलियों में
Shiva awasthi
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रोती हूँ तो साथ साथ में बजते हैं वो पायल में ऐसे घुॅंघरू बाॅंध गया
Shiva awasthi
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जितनी चहल पहल दोपहरी उतनी ख़ाली ख़ाली शाम सुरसा जैसी तन्हाई ने लो फिर मेरी खा ली शाम
Shiva awasthi
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कोई जो आएगा तो फिर समेट ही लेंगे अभी तो ख़ुद को बिखेरे हुए हैं कमरे में
Shiva awasthi
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गले से यूँँ मुझे लगाओ कभी, कि मेरी पसलियाँ चटख जाएँ
Shiva awasthi
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