कुछ न कुछ कहके सबने किनारा किया सो सुना सब वही फिर दुबारा किया है अना में छुटा ख़ूब-सूरत वो शख़्स हम ने नुक़सान ख़ुद ही हमारा किया
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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जो पहलू में है तन्हाई है मेरे दोस्त यही अपनी शनासाई है मेरे दोस्त
Aditya Maurya
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चाह कर भी मुझ को ये छोड़ना नहीं है दर्द मेरे में किसी की ये आख़िरी निशानी है
Aditya Maurya
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समझने में उस को न हो मुझ से ये भूल कि कोई तो मुझ को समझदार कर दे
Aditya Maurya
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कमा लो नाम चाहे जितना भी पर गाँव में तो दोस्त बुजुर्गों की सभी को आज भी पहचान लगती है
Aditya Maurya
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वक़्त के ही साथ घट जाएँ तो अच्छा दरमियाँ दोनों के जितनी दूरियाँ हो तुम को अपना कह दिया सो सब है मंज़ूर जितनी भी अब यार तुझ में ख़ामियाँ हो
Aditya Maurya
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