कुछ सबक़ पढ़ लिए किताबों से हम ने ज़िंदगी बात को अना पर ले बैठी
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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वफ़ा जताता हुआ दिल की ओर आता हुआ हर एक शख़्स तेरा हम-शबीह लगता है
Manmauji
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तमाम मुश्किलें आती हैं लौट जाती हैं मेरी कलाई पे रेशम का देख कर धागा
Manmauji
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किसी क़ीमत पर उन की आँख में आँसू नहीं मंज़ूर मगर ख़ुश हूँ कि वो कल ता-सहर मेरे लिए रोए
Manmauji
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मेरा तो ये इम्तिहाँ पर इम्तिहाँ लेती रही कौन हैं वो लोग जिन की ज़िंदगी गुलज़ार है
Manmauji
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तुम्हें लहू से तो ख़त लिख नहीं सके लेकिन लिखी है आँख के पानी से शा'इरी तुम पर
Manmauji
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