कुछ किताबें हैं बस ताक़ पर और हर तरफ़ बिखरे यादों के साए
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं कैसे हार मानूँ बिन लड़े ग़ुरबत के सहरा से अभी तो ग़म भुलाने हैं ख़ुशी का बीज बोना है
Amaan Pathan
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उस ने रक्खा था हाथ साहिल पर तब से दरिया में भी शरारे हैं
Amaan Pathan
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ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं
Amaan Pathan
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जो भी मिला वो रख लिया हम ने सहेज कर अब और क्या ही माँगते इस आशिक़ी से हम
Amaan Pathan
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बाम-ए-गर्दूं पे जो सितारे हैं तेरी आँखों के इस्तिआरे हैं
Amaan Pathan
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