कुछ लफ़्ज़ों में कैसे कह दूँ अपने दिल के जज़्बातों को इस धक-धक करती धड़कन को इन पल-पल चलती साँसों को
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़िन्दगी आसान है पर लोग हैं मुश्किल बहुत ही
Sarvjeet Singh
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ज़माना ख़ुद को बदले या न बदले ये उसी पर है कही पर तुम किसी की यूँँ न अपने आप को बदलो
Sarvjeet Singh
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उसे इस बात का डर है कहीं कुछ छूट जाएगा मुझे इस बात का डर है कहीं सब कुछ न मिल जाए
Sarvjeet Singh
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सर्व तुम्हारी आँखों में वो पढ़ नईं पाई प्यार कभी और तुम ये कहते थे उस को पढ़ना लिखना आता है
Sarvjeet Singh
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तू साथ है जब तक मिरे तब तक ही जीवन चाहिए तू चाँद से मेरे लिए मत उम्र लंबी माँगना
Sarvjeet Singh
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