क्या चाहते हो तुम ये कोई पूछ ले अगर माँ के वो मैले हाथ वो आँखों को चूमना
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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उस की तस्ख़ीर नहीं कोई जहाँ में साक़ी चाँद लाओ या ज़मीं को ही उलट कर देखो
Shadab bastavi
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उदासी रो के ये बोली मैं हूँ दरकार-ए-शादाबी मैं तेरी आशियाँ की सम्त उस को मोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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वो रो रहा है उसे चुप करा दो मत रोए कि इस जहाँ के लिए रो रहा यही दुनिया
Shadab bastavi
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वो मुझ सेे रोज़ कहती थी मुझे तुम चाँद ला कर दो उसे इक आइना देकर अकेला छोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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सल्तनत तर्क किया क्यूँ चुना जंगल उस ने एक राजा ने मुहब्बत यूँँ निभाई होगी
Shadab bastavi
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