लाज़िम है अब कि आप ज़ियादा उदास हों इस शहर में बचे हैं बहुत कम उदास लोग
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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मिले थे फरवरी में आपसे पहली दफ़ा हम तभी से दोस्ती सी हो गई है फरवरी से
Bhaskar Shukla
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वैसे तो उस का नाम नहीं हाफ़िज़े में अब मुमकिन है रूबरू जो कभी हो, पुकार दूँ
Bhaskar Shukla
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आँखें मैं ने बंद रखी हैं या'नी उन को देख रहा हूँ
Bhaskar Shukla
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वरना तो ये दीवार-ओ-दर लगता है तुम होती हो घर में तो घर लगता है
Bhaskar Shukla
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ठीक थी उन सेे मुलाक़ात मगर ठीक ही थी फ़िल्म इतनी नहीं अच्छी कि दोबारा देखूँ
Bhaskar Shukla
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