लड़खड़ा कर तू गिरा तो क्यूँ रहे मायूस ख़ुद से कर परीक्षा उन परों की जो अभी खोले नहीं थे
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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उस की आँखें याद हैं मुझ को उस का चेहरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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पिछला शे'र मुक़र्रर कर दो अगला मिसरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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तेरी तस्वीर नज़रों में ज़रा उतरे मेरे सिर से भला कैसे नशा उतरे
Vivek Vistar
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वो बहकर जब निकलती है हिमालय–आशियाने से उसी गंगा का होना मन–इलाहाबाद करता है
Vivek Vistar
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कोई भी उम्मीद उन सेे हम लगा सकते नहीं जो मुहब्बत से ज़रा भी मुस्कुरा सकते नहीं
Vivek Vistar
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