लगाता अब वही इल्ज़ाम हम पर लुटाता था कभी जो शाम हम पर
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
Faiz Ludhianvi
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फिर उसी बे-वफ़ा पे मरते हैं फिर वही ज़िंदगी हमारी है
Mirza Ghalib
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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पहले आना आ कर जाना आप की मर्ज़ी थी सारी मेरा क्या है मैं तो तन्हा कल भी था और आज भी हूँ
Murari Mandal
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तुम्हारे भी अधर महसूस कर पाए वो ठंडक कभी जो कल्पना कर के उसे चूमा करूँँगा
Murari Mandal
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इशारों को मेरे मेरी रज़ा समझे उसे हक़ है मुझे वो अब बुरा समझे समझने की नहीं है बात अब कोई मुझे यूँँ देख कर जी आप क्या समझे
Murari Mandal
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समझ सकता नहीं कोई मिरी हालत को 'माधव' जी मैं उस को देख सकता हूँ मगर अब छू नहीं सकता
Murari Mandal
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युद्धों के परिणाम अवध में लौटे हैं जबसे अपने राम अवध में लौटे हैं ऐसी ज्योति जगी है घर में दीपों से जैसे चारों धाम अवध में लौटे हैं
Murari Mandal
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