माँ-बाप को धिक्कारें अतफ़ाल जो भी, उन सेे ज़्यादा न है दुनिया में इफ़लास-ज़दा कोई
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
Abha sethi
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ज़रूरत नहीं इत्र की अब हमें ख़यालो से तेरे महक हम गए
Abha sethi
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तुम्हें कुछ यूँँ भी ख़ुद में है जिया मैं ने तिरी यादों का हर क़तरा पिया मैं ने
Abha sethi
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ये ज़िन्दगी ग़मगीन है ले साध वो परवीन है
Abha sethi
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तल्ख़ी है क्यूँँ ये कैसी मनमानी है क्यूँँ रूठे हो मुझ सेे क्या ही ठानी है
Abha sethi
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